Showing results for "dr pradeep kumar"
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2025
EN
This book aims to serve as a comprehensive introduction to the principles, algorithms, and applications of machine learning, with a particular emphasis on both foundational and cutting-edge techniques. It is designed for students, researchers, and practitioners who wish to deepen their understanding of machine learning concepts, explore their practical applications, and grasp the underlying mathematical frameworks.The content spans a broad range of topics, beginning with fundamenta...
दीपशिखा
Deepshikha
2017
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"दीप " और " दीपशिखा " का शाश्वत मेल पूर्णता का द्योतक है | बिना दीप के दीपशिखा का न तो यथार्थ अस्तित्व है और न ही दीपशिखा के बिना दीप का कोई अर्थ है | यही बात जीवन पर भी पूर्णत: लागू होती है , क्यों कि वास्तविक और सार्थक जीवन वही है जो उद्देश्यपूर्ण , सार्थक , मंगलकारी और उत्सव के रूप में हो | जीवन का यह स्वरूप तभी संभव है , जब पति-पत्नी , प्रेमी-प्रेमिका , सखा-सखि आपसी प्रेम , विश्वास , मर्यादा ,समर्पण , निष्ठा और आत्मिक लगाव की श्रेष्ठता को सत्व गुण की प्रबलता के साथ अनन्तचतुष्ट्य स्वरूप...
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2012
EN
In this article, the author discusses the great Biblical verse, Luke 11: 9-10. The question here is what is the spiritual underpinning from which one must ask to bring forth that which one wants? Where is that placement in our hearts (or souls) from which we must ask? If only we could be in alignment in our asking--all would unfold perfectly in our lives. Author Bio: Christopher Alan Anderson (1950 - ) received the basis of his education from the University of Science and Philosophy, Swann...
2015
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In this crafted and detailed eBook, Jana Dbouk takes readers through the nooks and crannies of the popular on-demand service website, Fiverr.com.Embark on a journey as the author guides readers through various sections of Fiverr, giving tips on different selling techniques and while providing over a thousand gig ideas. A perfect read for those looking to get a start freelancing, or to develop their freelance services even further.
अनुनाद
Anunad
- Series -
- Sumit Gautam
2017
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दुनियावी जटिलताओं को सुलझाने के लिए दौड़ते हुए जब एक पाँव के जूते का तस्मा खुलकर दूसरे पाँव के जूते में उलझ जाता है, तब जीवन के मायने तलाशने की आपाधापी शुरू हो जाती है। अँधेरी गलियों में कविताओं की लालटेन जब जलती है, उसकी रोशनी में तमाम वो चीजें आलोकित हो जाती है जो उपेक्षित और निर्वासित हो चली थी। साइकिल की घंटी चुटकी में तानपुरा बनकर गूँजने लगती है जिसका 'अनुनाद' पीढ़ियों तक मुखरित होता है। ऐसी ही लालटेन है सुमित गौतम का काव्य संग्रह 'अनुनाद'।
यादों में तुम
Yaadon Men Tum
2017
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मैंने ‘यादों में तुम’ (काव्य-संग्रह) पूरी तरह से प्रेम पर केंद्रित किया है और अपनी कविताओं के द्वारा प्रेम के विविध आयामों को पाठकों एवं समीक्षकों के समक्ष लाने का प्रयास किया है। मैंने अधिकांश कविताएँ समाज में व्याप्त भौतिक प्यार को केन्द्र में रखकर लिखा है, ताकि समय रहते प्रेम जैसे पाक शय को वासना से बचाया जा सके। ऐसा नहीं है कि मैं कोई विद्वान हूँ और अपनी विद्वत्ता को उजागर कर रहा। मगर समाज में आज जो भौतिक प्यार का आडम्बर लगता जा रहा, वह किसी भी मायने में हमारे और हमारे समाज के लिए हितक...
जज्बात-ए-क़लम- एक खूबसूरत एहसास
Jazbaat A Kalam: Ek Khoobsurat Ehsaas
2017
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साहित्य का जिन्दगी से हमेशा रिश्ता रहा है। कभी जिन्दगी को पन्नों पर उतारी है तो कभी खुद जिन्दगी बन कर पन्नों पर उतर गयी है। आज के इस दौर में मासूम से लेकर बुजुर्ग तक सभी में एक अजीब सा बदलाव आ गया है। दिलों में दूरियाँ बढ़ती जा रही हैं। तहजीब तो ऐसे लगता है कि किसी चिड़िया का नाम हो जो अपना बसेरा उजाड़ कर खुद ही कहीं दूर चली गयी हो। ऐसा नहीं है कि आज के दौर में वो लोग नहीं हैं जो तहजीब को लेकर फिक्रमंद ना हों। ऐसे ही कुछ दीवानों से भरी है ये पुस्तक। इस पुस्तक की खूबी ये है कि हिन्दुस्तान के अ...
कुछ रंग ज़िन्दगी के
Kuch Rang Zindagi Ke
2017
EN
दुनिया में अमीर है कोई,दर्द, गरीब का बाँटता है कोई,जानकर भी अनजान बन जाते है,निःस्वार्थ प्रेम जताता है कोई,ख़ुशी किसी कोई रास नहीं आती,दर्द में यूँ ही मुस्कुराता है कोईपेट भर भोजन करके भीथाली देख दूसरे की ललचाता है कोईभीतर अपने झांकता नहींसीख दूसरों को सिखाता है कोई
अनकहे पहलू
Ankahe Pahlu
2017
EN
आज के दिनहर माँ अपने बच्चों के लिएउनकी सलामती औ लम्बी उम्र के लिएललही छठ का व्रत रहती है।वो देखना चाहती हैंअपने लाल को सदा सुखी और स्वस्थअनेकों विधि-विधानअन्न जल त्यागछठ माई से उनके लिएकरती हैं दुआएं।पर उन माताओं के दुख औरपीड़ा का कोई आंकलन नहींजिनके लालकलेजे के टुकड़े छिन गयेलापरवाही के शिकार हो गये।
प्रत्याशा एक पग पथ की ओर
Pratyasha Ek Pag Path Ki Aor
2017
EN
ह्रदय में भाव जगते है तो कलम चलती है, दिन रात उदित रहे, कभी न ये ढलती हैकरुणा, हास्य, व्यंग, आदि आभूषण है, इनके सानिध्य कविता जन्मति पलती है।।हिंदी साहित्य का इतिहास प्राचीनतम है। इसका आरम्भ वैदिक काल से माना जाता है। हिंदी कविता भी लगभग एक हजार वर्ष की यात्रा पूरी कर चुकी है। साहित्य अपने विभिन्न कालो में आदिकाल, भक्तिकाल, रीतिकाल और आधुनिक काल से अब तक इस लम्बी यात्रा में समय समय पर कालअनुरूप अपनी भाषा के सौंदर्य, शिक्षा, ज्ञान और प्रेरणा से संचित करता आ र...
कुछ तुम कहो कुछ मैं कहूँ
Kuch Tum Kaho Kuch Main Kahu
2017
EN
मैंने ‘कुछ तुम कहो कुछ मैं कहूँ’ काव्य-संग्रह को ‘यादों में तुम’ (काव्य-संग्रह) की तरह ही पूरी तरह से प्रेम पर केंद्रित किया है और अपनी कविताओं के द्वारा प्रेम के विविध आयामों को पाठकों एवं समीक्षकों के समक्ष लाने का पूरा प्रयास किया है। इस काव्य-संग्रह में मैंने एक नया प्रयोग करने की कोशिश भी की है। प्रस्तुत काव्य-संग्रह में कुल एक सौ इक्कीस प्रेम-कविताएँ हैं और मज़े की बात यह है कि जहाँ पहली कविता प्रेमी के पक्ष से लिखी है, वहीं दूसरी कविता प्रेमिका के पक्ष से लिखी है। मैंने इस काव्य-संग्...
यादो के कुछ मोती
Yado ke Kuch Moti
2017
EN
‘‘यादो के कुछ मोती‘‘का द्वितीय संस्करण आपके समक्ष है... ये नाम मैंने इसलिए चुना क्योंकि इसमें संकलित कविताएं मेरे जीवन के किसी एक पहलू की साक्षी नहीं है, बल्कि यूनिवर्सिटी में मेरे अध्ययन के दौरान, M.A. अंतिम वर्ष, जब से मैंने लिखना शुरू किया और फिर एक वर्ष का अंतराल, जो मेरे जीवन में एक रिक्त स्थान की तरह आया.... फिर विवाह, बच्चे, उनका बचपन, अचानक पति की मृत्यु, जीवन की एक दूसरी पारी की शुरुआत.. यानी लगभग 27-28 वर्षो की यादो के वो बिखरे मोती है, जो किसी कविता में आपको किसी कॉलेज की लड़की स...











